हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने शाबान की ईदो के अवसर पर हज़रत अब्बास (अ) के जीवन से संबंधित विशेष इंटरव्यू किया। जिसमे मौलाना ने अलमदारे कर्बला की जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। जिसे अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।
हौज़ा : हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की विलादत कब हुई? और आपके वालिद और वालिदा कौन थे?
मौलाना साजिद रज़वीः हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की विलादत 4 शाबान 26 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई। यह दिन अहले-बैत से मोहब्बत रखने वालों के लिए खुशी और बरकत का दिन है। आपके वालिद अमीरुल मोमिनीन मौला अली अलैहिस्सलाम और वालिदा हज़रत उम्मुल बनीन सलामुल्लाह अलैहा थीं, जो तक़वा और इमान की बुलंद मिसाल थीं।
हौज़ा: बचपन में हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की तरबियत कैसे हुई? आपका इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से रिश्ता कैसा था?
मौलाना साजिद रज़वीः आपकी परवरिश ऐसे पाक माहौल में हुई जहाँ कुरआन, इल्म, अख़लाक़ और दीन की तालीम दी जाती थी। बचपन से ही आप बहादुरी और अदब के लिए मशहूर थे। आपका रिश्ता सिर्फ़ भाई का नहीं, बल्कि मुकम्मल इताअत और वफ़ादारी का था। आप इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को हमेशा अपना मौला समझते थे।
हौज़ा: आपको “अलमदार-ए-हुसैन” क्यों कहा जाता है? कर्बला में आपकी सबसे बड़ी कुर्बानी क्या थी?
मौलाना साजिद रज़वीः वाक़ेआ-ए-करबला में हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम को इस्लामी लश्कर का अलम सौंपा गया था। आख़िरी सांस तक आपने इस अलम संभाले रखा। कर्बला में हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की सबसे बड़ी क़ुर्बानी उनकी बे-मिसाल वफ़ादारी और मुकम्मल इताअत थी। आपने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के हुक्म पर अपनी जान, अपने हाथ और अपनी सारी ताक़त क़ुर्बान कर दी, लेकिन आख़िरी सांस तक हक़ और इमाम-ए-वक़्त का साथ नहीं छोड़ा। यह क़ुर्बानी सिर्फ़ जिस्मानी नहीं बल्कि ईमान और किरदार की बुलंदी की मिसाल है।
हौज़ा: फ़ुरात के किनारे पानी न पीने का क्या मतलब है?
मौलाना साजिद रज़वीः यह वाक़िआ आपकी बे-मिसाल वफ़ादारी और सब्र की दलील है कि खुद प्यासे होने के बावजूद आपने पहले बच्चों की प्यास को याद रखा।
हौज़ा: हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम को “बाबुल हवाइज” क्यों कहा जाता है? और आपकी शहादत से इस्लाम को क्या पैग़ाम मिला?
मौलाना साजिद रज़वीः अल्लाह ने आपको ऐसा मुक़ाम दिया कि लोग आपके वसीले से दुआ करते हैं और उनकी हाजतें पूरी होती हैं। आपकी शहादत यह पैग़ाम देती है कि हक़ के रास्ते में कुर्बानी ही असली कामयाबी है।
हौज़ा: आज के समाज के लिए हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी क्या सीख देती है? आपकी शहादत के बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का रद्द-ए-अमल क्या था?
मौलाना साजिद रज़वीः आपकी ज़िंदगी हमें वफ़ादारी, अदब, सब्र और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट जाने का सबक़ देती है। हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:
الان انکسرت ظهری یا اخی
“मेरे भाई आपके जाने से मेरी कमर टूट गई”, जो आपके मक़ाम और क़रीबी रिश्ते को बयान करता है।
आपकी टिप्पणी